सफलता के लिए नॉनवेज जरूरी नहीं : स्मृति-शिखा ने साबित किया क्रिकेट में

नई दिल्ली। आईसीसी महिला विश्व कप के 2017 संस्करण में सबसे ज्यादा बात पॉवर की हो रही है। इस टूर्नामेंट के लीग चरण में सबसे अधिक छक्के (97) मारे गए हैं, जबकि महिला एकदिवसीय मैच में पूरे साल में 79 छक्के मारे गए थे। कई छक्कों में गेंद ने बॉउंड्री को ही नहीं, बल्कि फेंस और प्रशंसकों के बीच तक पहुंची।

अब तक इस टूर्नामेंट में छह भारतीय खिलाड़ियों ने कुल 12 छक्के लगाए हैं, जो कि पिछले विश्व कप (14) में छक्कों की संख्या के लगभग बराबर हैं। इस बात को लेकर भी चर्चा हो रही है कि भारतीय खिलाड़ियों में पावर की कमी है। यह एक आम धारणा है कि मजबूत बनने के लिए मीट खाने की जरूरत है। सबूत के लिए पुलेला गोपीचंद एकेडमी को देखा जा सकता है, जहां से चैंपियन्स निकलते हैं।

यहां तैयार होने वाले खिलाड़ियों को चिकन खाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, भले ही वे पहले चाहें जो खाते रहे हों। सुझाव यह भी दिए जाते हैं कि पाकिस्तान से सबसे ज्यादा तेज गेंदबाज निकलते हैं क्योंकि वे बीफ खाते हैं।

मगर, भारतीय टीम में कुछ पावर पैक खिलाड़ियों ने साबित किया है कि हरी सब्जियां खाकर भी आप बड़ा खेल दिखा सकते हैं। भारत के ओपनिंग गेम में स्मृति मंधाना ने 72 गेंद में 90 रनों की पारी से ट्विटर पर तूफान ला दिया। उसने उस पारी में 11 बार गेंद को बाउंड्री लाइन के पार फेंका। मंधाना ने वेस्टइंडीज के खिलाफ एक शतक के साथ पारी खेली, जिसमें बाउंड्री पर लगाए गए दो हिट भी शामिल थे।

यह सब उसने तब किया, जबकि कभी भी मांस नहीं खाया। वहीं फास्ट बॉलर शिखा पांडे भी ताकत के लिए मीट खाना सही नहीं मनाती हैं। वह कहती हैं कि अपने खाने के लिए किसी निर्दोष जीव की हत्या करना ठीक नहीं है। उनके माता-पिता भी मीट नहीं खाते हैं। वह 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बॉलिंग करती हैं।

पांडे और मंधाना दोनों ने अपने खेल में बेहतर प्रदर्शन के लिए जिम में एक्सरसाइज और एक संतुलित पोषण लेने की बात कही। उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सफलता के लिए मीट नहीं, कड़ी मेहनत करने की जरूरत है।

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