10 बातों का ध्यान, जीत लेंगे अपने कलीग्स का मन

हम अपने अनुभव के आधार पर नए लोगों के लिए धारणाएं बना लेते हैं. दफ्तर में आपका साथी सिर्फ साथी नहीं, प्रतिस्पर्धी भी होता है. दफ्तर में एक-दूसरे के साथ अच्छे रिश्ते बनने में स्कूल, कॉलेज की तुलना में ज्यादा वक्त लगता है. नासमझी, चालाकी, दूसरों को कमतर मानना आदि के चलते रिश्ते बनते नहीं बिगड़ जाते हैं.

ये बातें जीतेंगी सबका मन

1. अपने और दूसरों के स्पेस का ध्यान रखें.

2. अपने व दूसरों के समय की कद्र करना दफ्तर में अच्छे संबंध बनाता है.

3. दूसरों से बात करने और उन्हें अपना परिचय देने की पहल अच्छी बात है, पर दूसरों से घुलने-मिलने की बेचैनी सही नहीं. अगर कोई व्यस्त है, तो उनके काम में बाधा पहुंचाकर बार-बार बातें न करें.

4. सहकर्मियों की बातचीत को पूरी उत्सुकता से सुनें, उनके काम की प्रशंसा करें.

5. सहकर्मी भोजन व कॉफी के लिए बुलावा दे रहे हैं तो उसे स्वीकार करें. अगर किसी ने नहीं भी पूछा है तो आप खुद भी उनके साथ लंच करने या कॉफी पीने के बारे में पूछ सकते हैं. अगर कोई न जा पाए तो मन-मुटाव न रखें.

6. धर्म, पहनावे, और लुक के संबंध में ठेस पहुंचा सकने वाली बातें करने से बचें. अगर आप कोई सहयोग दे सकते हैं तो जरूर दें.

7. लोगों से मजाक करने और उनसे सोशल मीडिया पर जुड़ने की हड़बड़ी न करें. अनजाने ही कुछ गलती होने पर उसे स्वीकारने में देर न करें.

8. खुद को बहुत भला और मिलनसार दिखाने की कोशिश न करें. जो हैं, वही रहें, शुरुआत में सहकर्मियों से मेल या फोन की जगह सीधी बातचीत करना अधिक बेहतर होता है.

9. आसपास के लोग बेवजह आपको गलत समझ रहे हैं तो यह उनकी समस्या है आपकी नहीं. आप बेफिक्री से अपना काम करें.

10. स्वभाव से संकोची, शर्मीले लोगों को अनजान लोगों के साथ मिलने-जुलने में समय लगता है. किन्हीं एक या दो लोगों के साथ अच्छे संबंध विकसित करें. मुस्कान के साथ सबका स्वागत करें.

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