जीडीए स्टाम्प घोटाला: सख्त HC ने कहा- अधिकारियों के नाम उजागर करें मुख्य सचिव

प्लाट आवंटन के दिन ही उसे बेचने में रेट में भारी अन्तर के चलते साढ़े तीन करोड़ के सरकारी नुकसान का आरोप लगाया गया है. कोर्ट ने मुख्य सचिव से 23 जनवरी को रिपोर्ट मांगी है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की स्वर्ण जयन्ती आवासीय कालोनी में लगभग डेढ़ सौ प्लाटों के पुर्नआवन्टन में हुए साढ़े तीन करोड़ के स्टाम्प घोटाले पर सख्त रुख अख्तियार कर लिया है. हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के स्टाम्प घोटाले में लिप्त अधिकारियों के नाम तीन हफ्ते में विवेचना अधिकारी को सौंपने का आदेश दिया है. कोर्ट ने एसएसपी गाजियाबाद की निगरानी में मामले की विवेचना सीओ से कराने का भी निर्देश दिया है.

कोर्ट ने मुख्य सचिव से 23 जनवरी को रिपोर्ट मांगी है. प्लाट आवंटन के दिन ही उसे बेचने में रेट में भारी अन्तर के चलते साढ़े तीन करोड़ के सरकारी नुकसान का आरोप लगाया गया है. हम आपको बता दें कि शर्तों के उल्लंघन के चलते प्लाटों का आवन्टन पहले निरस्त कर दिया गया था. लेकिन बाद में कोर्ट के आदेश पर प्लाटों के किए गए पुर्नआवन्टन में करोड़ों का स्टाम्प घोटाला हुआ है.

कोर्ट ने इतने बड़े घपले में दो लिपिकों को निलम्बित करने और बड़े अधिकारियों को बचाने पर भी सख्त नाराजगी जताते हुए यह आदेश दिया है. हाईकोर्ट के आदेश पर मुरादाबाद के आयुक्त की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी ने मामले की जांच की और रिपोर्ट में सरकार को राजस्व का नुकसान पहुंचाने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई करने की संस्तुति की है. लेकिन घपले में लिप्त अधिकारियों का नाम तक नहीं उजागर किया गया. जस्टिस अरुण टण्डन और जस्टिस राजीव जोशी की खंडपीठ ने राजेन्द्र त्यागी की याचिका आदेश दिया है.

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