जम्मू-कश्मीर में छह माह बाद होंगे विधानसभा चुनाव, गृहमंत्री अमित शाह ने रखा प्रस्ताव

दिसंबर 2018 से जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन लगा था जो दो जुलाई 2019 को पूरा हो रहा है. गृहमंत्री ने सदन से अनुरोध किया कि इस अवधि को छह माह के लिए और बढ़ाया जाए.

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को लोकसभा में जम्मू-कश्मीर आरक्षण विधेयक पेश कर दिया है. उन्होंने सबसे पहले सदन में जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन की अवधि बढ़ाए जाने का प्रस्ताव रखा. उन्होंने कहा कि दिसंबर 2018 में जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन लगा था जो दो जुलाई 2019 को पूरा हो रहा है. गृहमंत्री ने सदन से अनुरोध किया कि इस अवधि को छह माह के लिए और बढ़ाया जाए.

अमित शाह ने सदन को बताया कि रमजान और अमरनाथ यात्रा के बीच में आने के कारण चुनाव आयोग विधानसभा चुनाव कराने में अभी असमर्थ है. चुनाव आयोग ने इस साल के अंत तक चुनाव कराने का फैसला किया है. कई दशकों से इन महीनों में चुनाव नहीं हुआ है.

दो प्रस्ताव रखे अमित शाह ने
ऐसे में जरूरी है कि छह माह के लिए राष्ट्रपति शासन को मंजूरी दी जाए. सदन में अपनी बात शुरू करने से पहले गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि आज इस सदन के सामने मैं दो प्रस्ताव लेकर उपस्थित हुआ हूं. एक जम्मू-कश्मीर में जो राष्ट्रपति शासन चल रहा है, उसकी अवधि को बढ़ाया जाए और दूसरा जम्मू-कश्मीर के संविधान के सेक्शन 5 और 9 के तहत जो आरक्षण का प्रावधान है उसमें भी संशोधन करके कुछ और क्षेत्रों को जोड़ा जाए.

राष्ट्रपति शासन बढ़ाने का विरोध
लोकसभा में आरएसपी सांसद एनके प्रेमचंद्रन ने जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन बढ़ाने के प्रस्ताव का विरोध किया. इसी के साथ उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर के सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोग काफी समय से आरक्षण की मांग कर रहे थे लेकिन चुनावी फायदा देखते हुए अब इस बिल को लाने की तैयारी की जा रही है. प्रेमचंद्रन ने कहा कि मैं इस बिल का विरोध करता हूं. उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के साथ ही जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव क्यों नहीं कराए गए.

आरक्षण संशोधन बिल
इससे पहले लोकसभा का एजेंडा बताते हुए केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सदन को बताया कि
आज जम्मू कश्मीर आरक्षण संशोधन बिल सदन में पेश किया जाएगा और जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन छह माह बढ़ाने जाने पर चर्चा की जाएगी. इससे पहले आरजेडी सांसद मनोज झा ने राज्यसभा में दिल्ली यूनिवर्सिटी के एडहॉक टीचर्स का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि टीचर्स से एक कागज पर दस्तखत कराकर कम सैलरी दी जाती है. गौरतलब है कि अगले हफ्ते सदन में मेडिकल काउंसिल बिल, तीन तलाक बिल, डेंटिस्ट बिल और केंद्रीय बजट पेश किया जाएगा.

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