महागठबंधन तो छोड़िए, इन राज्यों में गठबंधन करने में भी फेल रही कांग्रेस

उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल जैसे तमाम राज्यों में कांग्रेस की आस पर ब्रेक लग चुका है, जबकि बिहार जैसे राज्य में अभी भी पेंच फंसा हुआ है.


वर्तमान राजनीति का दौर गठबंधन पर केंद्रीत है. गठबंधन की राजनीति के हिसाब से देखें तो एनडीए तमाम दुश्वारियों से उबर चुका है, लेकिन यूपीए अभी भी उससे जूझ रहा है. पिछले कुछ समय से ‘महागठबंधन’ को नरेंद्र मोदी से लड़ने का सबसे बड़ा चुनावी हथियार माना जा रहा था. हालांकि चुनाव नजदीक आते आते विपक्ष का यह ​हथियार भी धराशायी हो गया. उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल जैसे तमाम राज्यों में कांग्रेस की आस पर ब्रेक लग चुका है, जबकि बिहार जैसे राज्य में अभी भी पेंच फंसा हुआ है.

बिहार में लोकसभा चुनावों से पहले विपक्षी महागठबंधन में सीटों का पेंच फंसता दिख रहा है. महागठबंधन के घटक दलों आरजेडी, कांग्रेस, रालोसपा और हम के बीच सीटों को लेकर अभी तक सहमति नहीं बन पाई है. इस बीच आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने शनिवार को ट्वीट के जरिए इशारों में कांग्रेस और सहयोगी दलों को नसीहत दी थी. उन्होंने साफ किया कि अगर कांग्रेस ने अपना अहंकार नहीं छोड़ा तो सहयोगी दल उसका साथ छोड़ सकते हैं. वहीं तेजस्वी के इस ट्वीट से कांग्रेस आलाकमान नाराज है और खबर है कि तेजस्वी आज दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात कर सकते हैं.

जबकि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस गठबंधन का हिस्सा नहीं है. कुछ समय पहले सपा और बसपा ने गठबंधन करके कांग्रेस के ‘महागठबंधन’ पर पानी फेर दिया. हालांकि सपा बसपा गठबंधन ने कांग्रेस के लिए दो सीटे छोड़ने का फैसला लिया है. वहीं रविवार को कांग्रेस ने भी सपा बसपा और आरएलडी के गठबंधन के लिए 7 सीटें छोड़ने का फैसला लिया है.
 अब दिल्ली में भी तय हो गया है कि आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच किसी तरह का गठबंधन नहीं होगा. दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष शीला दीक्षित साफ कह चुकी हैं कि आम आदमी पार्टी से कोई गठबंधन नहीं होगा. ऐसा भी कहा गया कि राहुल गांधी ने भी इससे इंकार कर चुके हैं.

अब दिल्ली में भी तय हो गया है कि आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच किसी तरह का गठबंधन नहीं होगा. दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष शीला दीक्षित साफ कह चुकी हैं कि आम आदमी पार्टी से कोई गठबंधन नहीं होगा. ऐसा भी कहा गया कि राहुल गांधी ने भी इससे इंकार कर चुके हैं.

 असम में बीजेपी असम गण परिषद से गठबंधन करने में सफल रही है. वहीं, कांग्रेस और ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के बीच गठबंधन के कयासों पर ब्रेक लग चुका है. एआईयूडीएफ ने साफ तौर पर कहा है कि चुनाव से पहले वे किसी भी पार्टी से गठबंधन नहीं करेगी.

असम में बीजेपी असम गण परिषद से गठबंधन करने में सफल रही है. वहीं, कांग्रेस और ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के बीच गठबंधन के कयासों पर ब्रेक लग चुका है. एआईयूडीएफ ने साफ तौर पर कहा है कि चुनाव से पहले वे किसी भी पार्टी से गठबंधन नहीं करेगी.

 मध्य प्रदेश में पिछले साल ही कांग्रेस और बसपा के बीच गठबंधन के कयास लगाए जा रहा थे. लेकिन विधानसभा चुनाव अकेले लड़कर बसपा ने उन कयासों पर विराम लगा दिया. हालांकि मध्य प्रदेश की कांग्रेस सरकार को बसपा के एकमात्र विधायक का समर्थन प्राप्त है, लेकिन मायावती कांग्रेस के साथ गठबंधन से साफ तौर से इंकार कर चुकी हैं.

मध्य प्रदेश में पिछले साल ही कांग्रेस और बसपा के बीच गठबंधन के कयास लगाए जा रहा थे. लेकिन विधानसभा चुनाव अकेले लड़कर बसपा ने उन कयासों पर विराम लगा दिया. हालांकि मध्य प्रदेश की कांग्रेस सरकार को बसपा के एकमात्र विधायक का समर्थन प्राप्त है, लेकिन मायावती कांग्रेस के साथ गठबंधन से साफ तौर से इंकार कर चुकी हैं.

 पश्चिम बंगाल में कांग्रेस और वाम मोर्चे के बीच गठबंधन नहीं हो सका. वाम मोर्चे ने अपने 25 उम्मीदवारों की घोषणा कर कांग्रेस को झटका दिया है. हालांकि दोनों ओर से अभी भी कहा जा रहा है कि गठबंधन की संभावनाएं जारी हैं.

पश्चिम बंगाल में कांग्रेस और वाम मोर्चे के बीच गठबंधन नहीं हो सका. वाम मोर्चे ने अपने 25 उम्मीदवारों की घोषणा कर कांग्रेस को झटका दिया है. हालांकि दोनों ओर से अभी भी कहा जा रहा है कि गठबंधन की संभावनाएं जारी हैं.

 जम्मू कश्मीर में अभी भी कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच गठबंधन के आसार जताए जा रहे हैं. नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने भी स्वीकार किया है कि उन्हें गठबंधन का प्रस्ताव मिला है. लेकिन, इसे आगे बढ़ाने के लिए अब्दुल्ला ने एक शर्त भी रख दी है. ऐसा कहा जा रहा है कि उनके बीच सीट बंटवारे को लेकर खींचतान जारी है.

जम्मू कश्मीर में अभी भी कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच गठबंधन के आसार जताए जा रहे हैं. नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने भी स्वीकार किया है कि उन्हें गठबंधन का प्रस्ताव मिला है. लेकिन, इसे आगे बढ़ाने के लिए अब्दुल्ला ने एक शर्त भी रख दी है. ऐसा कहा जा रहा है कि उनके बीच सीट बंटवारे को लेकर खींचतान जारी है.

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