सोशल मीडिया के साइड इफ़ेक्ट्स से बच्चों को बचाने के लिए अपनाएं ये ट्रिक्स

सोशल नेटवर्किंग साइट्स ने कुछ इस तरह हमारी जिंदगी में दखल दिया है कि हमें उनकी लत लग गई है.

बच्चे तो बच्चे बड़े भी इस लत के शिकार हैं. जिन मां-बाप को लगता है कि उनका बच्चा दिन भर मोबाइल

में लगा रहता है और धीरे-धीरे वर्चुअल दुनिया में ज़्यादा व्यस्त रहने की वजह से रियल दुनिया से दूर जा रहा है,

उन्हें अपने बच्चे पर ध्यान देने की जरूरत है. अगर बच्चा ऐसे ही व्यवहार करता रहा तो उसके करियर पर भी

असर पड़ सकता है.

कैसे बनें वॉचडॉग?
सेंसरशिप जरूरी है. अपने बच्चे के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर ध्यान बनाए रखें. किस तरह के ग्रुप्स

में वो सक्रिय है, उसकी दोस्ती कैसे लोगों से है इस पर ध्यान देते रहें.

सर्चलिस्ट पर रखें नजर?

कोई और आपके लिए कुछ नहीं करेगा. इसलिए अपने बच्चों पर नजर बनाए रखें.

बच्चे को न होने पाए शक
अगर आपके बच्चे को ये एहसास हो गया कि आप उसकी जासूसी कर रहे हैं तो भूलकर भी वो आपसे

कभी कुछ नहीं बताएगा. इस बात का ध्यान रखें.

बच्चों से रखें दोस्ताना व्यवहार
अगर आपका बच्चों से दोस्ताना व्यवहार नहीं रहेगा तो वे आपसे अपनी पर्सनल बातें शेयर करने से डरेंगे.

इसलिए दोस्ताना व्यवहार बनाकर रखें. इतना तो जरूर कि वे बिना डरे आपसे अपने मन की बातें कह सकें.

प्यार से समझाएं
अगर आपका बच्चा सोशल मीडिया पर गलत संगत में फंस गया है तो उसे समझने की कोशिश करें.

अगर वह इतना ही समझदार होता तो बच्चा क्यों होता. इस बात को समझें. उसे प्यार से होने वाले नुकसान

के बारे में समझाएं. शायद तभी उसे सही समझ आए.
किशोरावस्था बहुत नाजुक उम्र होती है. इसमें अगर थोड़ी सी भी दरार आपके और आपके बच्चे के बीच

में पड़ी तो बच्चे का भविष्य खतरे में पड़ सकता है.

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